पुलिस मूक दर्शक क्यों बनी रही?
इस घटना के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं पहले वीडियो में एक पुलिसकर्मी साधुओं को पुलिस चौकी से बाहर निकाल कर भीड़ के बीच में छोड़ देता है इसके बाद पूरी भीड़ दोनों महात्माओं पर लाठी डंडे ले कर टूट पड़ती है। हालाँकि जब पुलिसकर्मी साधुओं को पुलिस चौकी से निकाल कर भीड़ के बीच में धकेल रहा होता है उस समय भी एक साधू का सिर खून से लथपथ था , इस से ये अंदाजा लगाया जा रहा है, कि पहले भी उन पर लाठी डंडो से हमला किया गया होगा।
दूसरे वीडियो में एक साधू बार बार एक पुलिसकर्मी से जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन वो पुलिसकर्मी खुद को साधू से छुड़ाता हुआ नज़र आ रहा है। और भीड़ बेख़ौफ़ हो कर पुलिस के ही सामने निर्मम तरीके से दोनों महात्माओं और उनके ड्राइवर पर लाठी डंडे बरसाती रहती है।
अब सवाल ये है कि पुलिस ने उन्हें भीड़ के बीच में क्यों धकेल दिया था। पुलिस की तरफ से तीनों लोगों को बचाने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया। अगर चौकी पर पर्याप्त पुलिस बल नहीं था तो नजदीकी थाने से सहायता क्यों नहीं मांगी गई। लॉकडाउन में कैसे 200 से अधिक लोगों की भीड़ अचानक से आ गयी?
जैसा कि आप वीडियो में भी देख सकते हैं कि जब भीड़ द्वारा उन्हें बेरहमी से पीटा जा रहा है तो न सिर्फ पुलिस वहाँ मौजूद है बल्कि एक वीडियो में तो खुद ही पुलिस संत कल्पवृक्ष गिरी महराज को पुलिस चौकी से बाहर लाते और फिर भीड़ के सामने यूँ ही असहाय हालत में छोड़ती नजर आ रही है। भीड़ को पीटते देख भी पुलिस की कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। अलबत्ता पुलिस वाला खुद ही बचता नजर आ रहा है। नहीं तो पुलिस की मौजूदगी में कम से कम संतों की इस तरह से बर्बर हत्या नहीं हुई होती।
वही दूसरी अभी तक किसी भी बॉलीवुड हस्ती का कोई भी ट्वीट इस मॉब लिंचिंग को ले कर नहीं आया है। क्यों कि मामला हिन्दुओ से जुड़ा है इसलिए मीडिया के एक धड़े ने मौन व्रत रख लिया है। जब अन्य किसी संप्रदाय से सम्बंधित कोई घटना होती है तो मीडिया का यही हिस्सा छाती पीट पीट कर विधवा विलाप कर रहा होता है। लेकिन हिन्दू धर्म के दो महात्माओं और उनके ड्राइवर की निर्ममतापूर्ण तरीके से पुलिस की मौजूदगी में हत्या का जघन्य अपराध हुआ है तो तब ना तो किसी बॉलीवुड हस्ती का ट्विटर कुछ बोल रहा है और ना वामपंथी मीडिया इस पर रिपोर्टिंग कर रहा है।
तीन राउण्ड हवाई फिरिंग से भी तीन जान बचाई जा सकती थी।😢 https://t.co/JxDz2m6SqN— Anirudha Singh (@actoranirudha) April 19, 2020
अब वही न्याय का खेल होगा, वकील-वकील, गवाह-गवाह, सबूत-सबूत का खेल कोर्ट में खेला जायेगा कोई आरोपी बच भी जायेगा, किसी को सजा भी मिलेगी। लेकिन उस से होगा क्या। इतनी निर्ममता और वहशीपन से की गई हत्या का दर्द क्या उन लोगो के दिल और दिमाग से निकल पायेगा जो इस घटना से बुरी तरह से दुःखी है? एक बात तो माननी पड़ेगी कि पुलिस ने अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं किया, अगर पुलिस चाहती तो उन महात्माओं और उस ड्राइवर के जीवन को बचाया जा सकता था।
Not once, again & again & again....@NDTV, @ndtvindia, Journalism— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) April 20, 2020


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