रामायण देखकर बच्चे सीख रहे हैं शुद्ध हिंदी :
जैसा कि आप सब जानते है देश कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 3 मई तक लॉकडाउन का दूसरा चरण चल रहा है। इस दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दूरदर्शन पर रामानंद सागर द्वारा बनाए गए टेलीविजन धारावाहिक रामायण का दोबारा प्रसारण शुरू किया है। जो घर के बड़े और बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों का भी पसंदीदा कार्यक्रम बन गया है।
भारत में 33 साल बाद लौटा रामायण सीरियल सभी आयु के लोगो की पहली पसंद बन चुका है। लोग प्रत्येक दिन सुबह और रात्रि 9 बजे टेलीविजन के सामने बैठकर रामायण देख रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरुप डी.डी. नेशनल नंबर 1 चैनल बन गया है।
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रामायण धारावाहिक ने सभी को प्रभावित किया है लेकिन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे हो रहे हैं। किरदारों की भाषा शैली बच्चों को बहुत पसंद आ रही है। अब बच्चे इस भाषा का दैनिक जीवन में उपयोग करने लगे हैं।
परिजनों का कहना है इन शब्दों को बोलने से उन्हें अपनापन महसूस होता है। जब से रामायण शुरू हुआ है तब से बच्चों और हमारी भाषा शैली पर भी बड़ा असर पड़ा है।
रामायण देखकर बच्चे काफी सवाल करने लगे हैं। वो परिजनों से पूछ रहे हैं कि, गुरुकुल कब और क्यों बंद हुए? बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में क्यों छोड़ दिया जाता है? भाइयों में लड़ाई क्यों होती है? हनुमान जी ने इतना बड़ा समुद्र कैसे लांघा?
इसके अलावा बच्चे नए हिंदी शब्द भी सीख रहे हैं। सिर्फ सीख ही नहीं रहे बल्कि अपने दैनिक जीवन में भी इन शब्दों को प्रयोग कर रहे हैं।
बच्चे टीचर को गुरुजी, माता-पिता को माताजी और पिताजी, चाचा-चाची को काका और काकी, भाई को भ्राता और खाने को भोजन कहकर पुकार रहे हैं।इनके अलावा भी कई अन्य हिंदी शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

