दीपक के साथ फूटे पटाखे

देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि  5 अप्रैल रात 9 बजे सभी लोग अपने घर के द्वार  और छत अथवा बालकनी में दीपक जलाये।  प्रधानमंत्री का उद्देश्य और नियत अच्छी थी कि हमारा देश जिस संकट से इस समय जूझ रहा है और जिस के कारण देश में लॉकडाउन चल रहा है ऐसे समय में देशवासियों का उत्साह और विश्वास खोना नहीं चाहिए, टूटना नहीं चाहिए।



इतिहास याद रखेगा इस दिन को
जब पूरा विश्व डगमगा रहा था
हिंदुस्तान जगमगा रहा था
और फिर 5  अप्रैल की तारीख आई।  सभी लोगों ने प्रधानमंत्री के कहे अनुसार अपने घर के द्वार, छत और बालकनी पर दिये, मोमबत्तियाँ आदि प्रज्वलित  कर प्रकाश किया।

जब छत पर दिए जलाये गए तो थोड़ा थोड़ा दीपावली का अनुभव भी हुआ और उस अनुभव को पूरा करने के लिए जो कमी रह रही थी उसको भी पूरा किया गया।  और वो कमी थी पटाखों की, बस फिर क्या था, किसी एक ने पटाखे फोड़ दिए फिर तो पूरे मोहल्ले, नगर, जिला और प्रदेश यहाँ तक देश भर से ऐसी वीडियो आनी शुरू हो गयी है।  जिनमे दीपक के साथ पटाखे, फूलझड़ी भी जलाये जा रहे हैं।  लोगो में उत्साह इतना है कि  जैसे इस देश में कोरोना नाम की समस्या है नहीं।


 21 दिन के लॉकडाउन में लॉकडाउन का आधा समय बीत चुका लेकिन अभी तक देशवासियों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।  और यह उपक्रम प्रधानमंत्री ने शायद इसलिए करवाया था ,जिस से यह देखा जा सके कि भारत देश के वासी अभी उस ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए है या नहीं।  और वह सच भी साबित हुआ।  संकट की इस घडी में पूरा देश एक है, और इस लड़ाई को हारने के मूड़ में नहीं है। साथ पूरे विश्व को ये सन्देश भी मिल गया कि भारत ऐसे संकट के समय में हार मानने वाला नहीं है, क्यों की इस देश के निवासियों में अथाह उत्साह और अपने प्रधानमंत्री के प्रति अटूट विश्वास है।