रामायण से जुड़े कुछ अनूठे तथ्य:
- रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है। गायत्री मंत्र में 24 अक्षर होते है और वाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक हैं। गायत्री मंत्र इस पवित्र महाकाव्य का सार है। गायत्री मंत्र को सर्व प्रथम ऋग्वेद में उल्लेखित किया गया था।
- श्रीराम और उनके भाइयों की एक बहन भी थीं जिनका नाम शांता था। वे उन सभी भाइयों से आयु में काफी बड़ी थीं तथा उनकी माता कौशल्या थीं। ऐसी मान्यता है कि एक बार अंगदेश के राजा रोमपद और उनकी रानी वर्षिणी अयोध्या आए। उनको कोई संतान नहीं थीl बातचीत के दौरान राजा दशरथ को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने कहा, मैं अपनी बेटी शांता आपको संतान के रूप में दूंगाl यह सुनकर रोमपद और वर्षिणी बहुत खुश हुएl उन्होंने बहुत स्नेह से उसका पालन-पोषण किया और माता-पिता के सभी कर्तव्य निभाए।
- श्रीराम भगवान् विष्णु के अवतार माने जाते हैं और लक्ष्मण शेष नाग के अवतार माने जाते है। उसी प्रकार भरत सुदर्शन-चक्र के और शत्रुघ्न शंख-शैल के अवतार माने जाते हैं।
- सीता स्वयंवर में प्रयोग हुए शिव जी के धनुष का नाम "पिनाक" था जिसपर श्रीराम ने प्रत्यंचा चढ़ाया था और तोड़ा था।
- ऐसा माना जाता है की लक्षमण वनवास के दौरान अपने भैया और भाभी की रक्षा करने के लिए 14 वर्षो तक जागते रहे थे। इसी कारण उन्हें "गुदाकेश" के नाम से बभी जाना जाता है। उनकी जगह उनकी पत्नी उर्मिला 14 वर्षो तक सोती रही थीं।
- श्रीराम, माता सीता तथा लक्ष्मण वनवास के दौरान जिस वन में रुके थे उस वन का नाम "दंडकारण्य" था। यह वन 35,600 वर्ग मील में फैला हुआ था जिसमें वर्तमान छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्से शामिल थे। उस समय यह वन सबसे भयंकर राक्षसों का घर माना जाता थाl इसलिए इसका नाम "दंडकारण्य" था जहाँ "दंड" का अर्थ “सजा देना” और "अरण्य" का अर्थ “वन” है।
- "लक्ष्मण रेखा" का वर्णन वाल्मीकि रामायण में नहीं है। पूरे रामायण की कहानी में सबसे पेचीदा प्रकरण लक्ष्मण रेखा प्रकरण है, जिसमें लक्ष्मण वन में अपनी झोपड़ी के चारों ओर एक रेखा खींचते हैंl जब सीता के अनुरोध पर राम हिरण को पकड़ने और मारने की कोशिश करते हैं, तो वह हिरण राक्षस मारीच का रूप ले लेता है। इस कहानी का वर्णन ना तो "वाल्मीकि रामायण" में है और ना ही "रामचरितमानस" में है। लेकिन रामचरितमानस के लंका कांड में इस बात का उल्लेख रावण की पत्नी मंदोदरी द्वारा किया गया है।
- रावण एक उत्कृष्ट वीणा वादक था। रावण एक बहुत ही बड़ा विद्वान था और उसने वेदों का भी अध्ययन किया था। भगवान शिव के प्रति उसकी दृढ़ आस्था थी। रावण के ध्वज में प्रतीक के रूप में वीणा होने का यही कारण है की वो एक उत्कृष्ट वीणा वादक था। हालांकि रावण इस कला को ज्यादा तवज्जो नहीं देता था लेकिन उसे यह यंत्र बजाना पसन्द था।
- रामायण में वर्णित है कि कुम्भकर्ण लगातार छह महीनों तक सोता रहता था और फिर सिर्फ एक दिन खाने के लिए उठता था और पुनः छह महीनों तक सोता रहता था। एक बार एक यज्ञ की समाप्ति पर प्रजापति ब्रह्मा कुन्भकर्ण के सामने प्रकट हुए और उन्होंने कुम्भकर्ण से वरदान मांगने को कहा। इन्द्र को इस बात से डर लगा कि कहीं कुम्भकर्ण वरदान में इन्द्रासन न मांग ले, अतः उन्होंने देवी सरस्वती से अनुरोध किया कि वह कुम्भकर्ण की जिह्वा पर बैठ जाएं जिससे वह "इन्द्रासन" के बदले "निद्रासन" मांग ले। इस प्रकार इन्द्र की ईर्ष्या की वजह से कुम्भकर्ण को सोने का वरदान प्राप्त हुआ था।
- रामायण की कहानी के अंतिम चरण में वर्णित है कि राम और लक्ष्मण ने वानर सेना की मदद से लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए एक पुल का निर्माण किया था। ऐसा माना जाता है कि यह कहानी लगभग 1,750,000 साल पहले की है। हाल ही में नासा ने पाक जलडमरूमध्य में श्रीलंका और भारत को जोड़ने वाले एक मानव निर्मित प्राचीन पुल की खोज की है और शोधकर्ताओं और पुरातत्वविदों के अनुसार इस पुल के निर्माण की अवधि रामायण महाकाव्य में वर्णित पुल के निर्माणकाल से मिलती है। नासा के उपग्रहों द्वारा खोजे गए इस पुल को "आदम का पुल" कहा जाता है और इसकी लम्बाई लगभग 30 किलोमीटर है।
- रावण को पता था की उसकी मृत्यु प्रभु श्रीराम के ही हाथो होगी। जब रावण के भाइयों ने सीता के अपहरण की वजह से राम के हमले के बारे में सुना तो अपने भाई को आत्मसमर्पण करने की सलाह दी थीl यह सुनकर रावण ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और राम के हाथों मरकर मोक्ष पाने की इच्छा प्रकट कीl उसके कहा कि "अगर राम और लक्ष्मण दो सामान्य इंसान हैं, तो सीता मेरे पास ही रहेगी क्योंकि मैं आसानी से उन दोनों को परास्त कर दूंगा और यदि वे देवता हैं तो मैं उन दोनों के हाथों मरकर मोक्ष प्राप्त करूँगा"।
हमे कमेंट करके जरूर बताये इनमें से कौन-कौन से तथ्य आपको पहले से ज्ञात थे।










