UP सरकार ने कर्मचारियों के 6 भत्ते समाप्त किए, 1500 करोड़ की होगी सालाना बचत





कोरोना वायरस महामारी के बाद आए अतिरिक्त वित्तीय बोझ को ध्यान में रखेत हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले कई भत्ते समाप्त करने का फैसला किया है। पिछले महीने सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलने वाले इन भत्तों को एक साल के लिए रोकने का फैसला किया था।


छह प्रकार के भत्तों को खत्म करने से सरकार को एक साल में तकरीबन 1500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। कोरोना आपदा के कारण खजाने को लगी तगड़ी चोट के कारण सरकार को यह फैसला करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

सूत्रों के अनुसार इन छह प्रकार के भत्तों को खत्म करने से सरकार को एक साल में तकरीबन 1500 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि कोरोना आपदा के कारण खजाने को लगी तगड़ी चोट ने सरकार को यह फैसला करने के लिए मजबूर किया है। भत्ते खत्म किये जाने से कर्मचारियों और उनके संगठनों में आक्रोश फैला हुआ है।

वित्त सचिव संजीव मित्तल की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर राज्य सरकार के राजस्व में आई कमी के बाद उन भत्तों की समीक्षा की गई, जो केन्द्र में या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर नहीं हैं और राज्य सरकार में अनुमान्य हैं।


इन भत्तों को खत्म करने का फैसला

नगर प्रतिकर भत्ता, सचिवालय भत्ता, पुलिस विभाग के अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग (सीबीसीआइडी), भ्रष्टाचार निवारण संगठन, आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग, सतर्कता अधिष्ठान, अभिसूचना विभाग, सुरक्षा शाखा और विशेष जांच शाखा में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वीकृत विशेष भत्ता, अवर अभियंताओं को स्वीकृत विशेष भत्ता, लोक निर्माण विभाग में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को दिया जाने वाला रिसर्च भत्ता, अर्दली भत्ता और डिजाइन भत्ता, सिंचाई विभाग में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को दिया जाने वाला इन्वेस्टिगेशन एंड प्लानिंग भत्ता और अर्दली भत्ता शामिल हैं।