पालघर में पिछले महीने लगभग नियोजित तरीके से साधुओं की हत्या का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील दिग्विजय त्रिवेदी की अदालत में जाते समय सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। बताया गया है कि कल मणिपुर के पास मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए हादसे में त्रिवेदी की मृत्यु हो गई थी, जब वह धनाऊ में अदालत जा कर रहे थे। संदेह है की यह एक साजिश के तहत किया गया है।

दिग्विजय त्रिवेदी (32) विश्व हिंदू परिषद की ओर से हिंदू साधुओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बुधवार को उन्हें अपना मामला धनाऊ की अदालत में पेश करना था, जहां मामले की सुनवाई चल रही है। वह भयंदर के निवासी थे और बहुजन विकास अघाड़ी के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी थे।

महाराष्ट्र पुलिस ने मामले में 141 लोगों को गिरफ्तार किया था, जहां 300 लोगों की भीड़ ने 2 साधुओं और उनके चालक की हत्या कर दी थी। सभी गिरफ्तार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि उनके बीच के नाबालिगों को किशोर गृह भेज दिया गया है।

लिंचिंग जिसने देश को झकझोर दिया- 

16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं की क्रूर हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। साधु कल्पवृक्ष गिरि (70) और सुशील गिरी, जो जूना अखाड़े के थे, को पालघर के गडचिंचल गांव में 300 से अधिक लोगों की जानलेवा भीड़ ने लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला था। 16 अप्रैल को घटी घटना तब सामने आई जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।

प्रारंभिक रिपोर्टों में बताया गया है कि ग्रामीणों ने बच्चों की चोरी और अपहरण के संदेह में उन्हें मार डाला। बाद में यह पता चला कि सीपीएम और क्रिसटन मिशनरियों की सांठगांठ ने स्थानीय लोगों का हिंदुओं के खिलाफ दिमाग लगाया था और लिंचिंग पूर्व नियोजित हो सकती थी।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में साधु पुलिस के साथ जाते हुए दिख रहे थे लेकिन भीड़ ने उन्हें दबोच लिया और लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। वीडियो में साफ़ नजर आ रहा था कि पुलिस द्वारा साधुओं को भीड़ में धकेला गया और पुलिस मूकदर्शक बन कर कड़ी रही।