मेघनाद को लक्ष्मण जी ही क्यों मार सकते थे 





रावण के पुत्र इंद्रजीत का नाम मेघनाद भी था। ये नाम उसे इसलिए मिला क्योंकि जब उसका जन्म हुआ  तब वो रोता हुआ पैदा हुआ उस समय उसकी आवाज़ (नाद) बादलों (मेघो) के गरजने जैसी थी। मेघ + नाद = मेघनाद, रावण का बेटा।

अगस्त्य मुनि श्री राम जिसे बोले- श्रीराम जी बेशक आपने रावण और कुंभकर्ण प्रचंड वीरों का वध तुमने किया था, लेकिन सबसे बड़ा वीर तो मेघनाध ही था। उसने अंतरिक्ष में स्थित होकर इंद्र से युद्ध किया था और उसे बांधकर लंका ले आया था।  ब्रह्मा ने इंद्रजीत से दान के रूप में इंद्र को मांगा तब इंद्र मुक्त हुए थे ॥ लक्ष्मण ने उसका वध किया इसलिए वे सबसे बड़े योद्धा हुए।




अगस्त्य मुनि ने कहा- प्रभु इंद्रजीत को वरदान था कि उसका वध वही कर सकता था जो


  • चौदह वर्षों तक न सोया हो,
  • जिसने चौदह साल तक किसी स्त्री का मुख न देखा हो और,
  • चौदह साल तक भोजन न किया हो। 




युद्ध की तैयारी कैसे करता था मेघनाद 

मेघनाद कैसे करता था युद्ध की तैयारी, रामायण की कथा में मेघनाद के पास कई सिद्धियां होने का वर्णन किया गया है. वो हर युद्ध के पहले यज्ञ करके अपनी कुल देवी को प्रसन्न करता था. आइए जानते हैं।

मेघनाद की शिक्षा दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य के निर्देशन में हुई थी. गुरु की सहायता से ही उसने सप्तयज्ञ किए थे. इन यज्ञों से खुश होकर उसे भगवान शिव ने दिव्य रथ, दिव्य अस्त्र और कई मायावी शक्तियां/सिद्धियां दी थीं. मेघनाद ने अपनी इन्हीं दिव्य शक्तियों का प्रयोग देवताओं से युद्ध के दौरान किया था।


रामजी ने लक्ष्मण जी से पूछा कि   


रामजी ने पूछा कि - हम तीनों चौदह वर्षों तक साथ रहे फिर तुमने सीता का मुख कैसे नहीं देखा ?, फल दिए गए फिर भी अनाहारी कैसे रहे ?, और 14 साल तक सोए नहीं ? यह कैसे हुआ ?

चौदह वर्ष लक्ष्मण जी कैसे नहीं सोये 

लक्ष्मण जी ने बताया कि आप औऱ माता एक कुटिया में सोते थे. मैं रातभर बाहर धनुष पर बाण चढ़ाए पहरेदारी में खड़ा रहता था।  निद्रा ने मेरी आंखों पर कब्जा करने की कोशिश की तो मैंने निद्रा को अपने बाणों से बेध दिया था। निद्रा ने हारकर स्वीकार किया कि वह चौदह साल तक मुझे स्पर्श नहीं करेगी लेकिन जब श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हो रहा होगा और मैं उनके पीछे सेवक की तरह छत्र लिए खड़ा रहूंगा तब वह मुझे घेरेगी। आपको याद होगा राज्याभिषेक के समय मेरे हाथ से छत्र गिर गया था।

चौदह साल तक लक्ष्मण जी बिना भोजन के कैसे रहे 

लक्ष्मण जीने बताया कि वो 14 साल तक अनाहारी कैसे रहा! मैं जो फल-फूल लाता था आप उसके तीन भाग करते थे. एक भाग देकर आप मुझसे कहते थे लक्ष्मण फल रख लो॥ आपने कभी फल खाने को नहीं कहा- फिर बिना आपकी आज्ञा के मैं उसे खाता कैसे, मैंने उन्हें संभाल कर रख दिया॥ सभी फल उसी कुटिया में अभी भी रखे होंगे ॥ प्रभु के आदेश पर लक्ष्मणजी चित्रकूट की कुटिया में से वे सारे फलों की टोकरी लेकर आए और दरबार में रख दिया॥ फलों की गिनती हुई, सात दिन के हिस्से के फल नहीं थे॥

प्रभु ने कहा- इसका अर्थ है कि तुमने सात दिन तो आहार लिया था

लक्ष्मणजी ने सात फल कम होने के बारे बताया- उन सात दिनों में फल आए ही नहीं :—


  • जिस दिन हमें पिताश्री के स्वर्गवासी होने की सूचना मिली, हम निराहारी रहे,
  • जिस दिन रावण ने माता का हरण किया उस दिन फल लाने कौन जाता,
  • जिस दिन समुद्र की साधना कर आप उससे राह मांग रहे थे,
  • जिस दिन आप इंद्रजीत के नागपाश में बंधकर दिनभर अचेत रहे,
  • जिस दिन इंद्रजीत ने मायावी सीता को काटा था और हम शोक में रहे,
  • जिस दिन रावण ने मुझे शक्ति मारी,
  • और जिस दिन आपने रावण-वध किया,

इन दिनों में हमें भोजन की सुध कहां थी॥ विश्वामित्र मुनि से मैंने एक अतिरिक्त विद्या का ज्ञान लिया था- बिना आहार किए जीने की विद्या. उसके प्रयोग से मैं चौदह साल तक अपनी भूख को नियंत्रित कर सका जिससे इंद्रजीत मारा गया ॥


लक्ष्मण जी ने मेघनाद को कौनसी शक्ति से मारा था 

जिस शक्ति से लक्ष्मण जी ने मेघनाद का वध किया, उस शक्ति को इंद्रास्त्र कहते है। ये मज़े की बात है कि इंद्रजीत को हराने के लिए इंद्र का अस्त्र ही काम आया।


 मेघनाद लक्ष्मण जी को कौनसी शक्ति से मूर्छित क्या था 

लक्ष्मणजी ने एक बाण से मेघनाद का रथ तोड़ डाला और सारथि के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। तब मेघनाद को लगा कि उसके प्राण संकट में आ गए। मेघनाद ने वीरघातिनी शक्ति चलाई। वह लक्ष्मणजी की छाती पर लगी। शक्ति के लगने से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। और लक्ष्मण को मरा हुआ जानकर मेघनाद युद्ध भूमि से चला जाता है।