बहुत से लोग अभी शायद नहीं जानते की 2 सितंबर को आने वाला त्यौहार ओणम क्यों मनाया जाता है !
आईये इस पर्व की कथा पर ध्यान देते हैं।
प्राचीन काल में पुराणों के अनुसार बलि नाम के एक राजा हुआ करते थे। जो दैत्य कुल से थे। वे पूर्ण रूप से अपनी प्रजा के लिए समर्पित थे। राजा बलि भी अन्य दैत्यों की तरह तपस्या कर के दिव्य शक्तियां प्राप्त कर के देवताओं के लिए मुसीबत बन गए थे।
लेकिन जनता के प्रति अच्छे भाव के कारण वे अच्छे राजा के रूप में मशहूर थे। उनकी प्रशंशा और यश को बढ़ता देख देवता घबरा कर अपनी बात लेकर भगवन विष्णु के पास पहुंचे। भगवन विष्णु ने देवताओं की बात सुन कर वामन अवतार लिया और राजा बलि से तीन पग भूमि मांग ली।
भगवन वामन ने मात्र दो पग में धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए कुछ भी शेष नहीं रह गया था। यह देख कर राजा बलि ने अपना सर झुका दिया। वामन भगवन ने पैर रख कर राजा को पाताल लोक भेज दिया। लेकिन उस से पहले राजा ने भगवन से वर्ष में एक बार धरती पर अपनी प्रजा से मिलने की आज्ञा मांग ली।
सदियों से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि ओणम के दिन राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, इसी खुशी में मलयाली समाज ओणम मनाता है। इसी के साथ ओणम नई फसल के आने की खुशी में भी मनाया जाता है।
इस अवसर पर केरल के
पारंपरिक लोकनृत्य शेर नृत्य, कुचिपुड़ी, गजनृत् आदि के साथ यह दिन बड़े ही
उत्साह से मनाया जाता है। माना जाता है कि तब से लेकर अब तक ओणम के अवसर
पर राजा महाबलि केरल के हर घर में उनका हालचाल जानने और उनके कष्टों को दूर
करने आते हैं।


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