राष्ट्र के लिए योगी का धर्म क्या होता है। यूपी के मुखिया ने बता दिया 



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 

लखनऊ में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने कोर टीम के साथ कोरोना से जंग पर मंत्रणा कर रहे थे तभी उन्हें यह खबर मिली जो आम आदमी के लिए दुखों का पहाड़ टूटने जैसा होता है। 

बैठक के दौरान CM योगी को अपने पिता के निधन की खबर मिली। उनके पिता का दिल्ली के AIIMS अस्पताल में इलाज चल रहा था। बताया जाता है कि इस खबर को सुनकर भी CM योगी विचलित नहीं हुए और कोर टीम के साथ बैठक करते रहे।  और बाद मे एक बयान जारी कर उन्होंने अपने  दिल की बात रखी :


अपने बयान में CM योगी ने कहा-अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं। जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्त्तव्यबोध के कारन मैं न कर सका।
पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूँ। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊंगा।
एक मुख्यमंत्री के लिए जनता की सेवा से बड़ा राज धर्म भला क्या हो सकता है। निजी शोक को परे रखकर योगी आदित्यनाथ ने ऐसा ही किया।

लेकिन ऐसे त्यागी संत के लिए कभी वामपंथी कन्हैया कुमार ने भोगी शब्द का प्रयोग किया था। भगवा के लिए अपने दिल में नफरत भरे कन्हैया कुमार ने योगी पर हमला बोलने के लिए भगवा का सहारा ले लिया और भारत के महापुरषों के हवाला दे कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अनर्गल प्रलाप भी किया। कन्हैया कुमार योगी जी के लिए कहता है कि योगी होने का ढोंग कर रहे है।

कोई कुछ भी कहे लेकिन आज का सच यही है कि, उत्तर प्रदेश के मुखिया ने अपना राजधर्म सही मायने में निभाया है।  जब देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से झूझ रहा है ऐसे में योगी जी ने वही निर्णय लिया जो एक सच्चे राजा और सच्चे सन्यासी को लेना चाहिए।  मुख्यमंत्री का ये निर्णय ऐसे लम्पट वामपंथियों के मुँह पर एक झन्नाटेदार तमाचा है जो सनातन धर्म के प्रति और उसके अनुयाइयों के प्रति अपने हृदय में घृणा और नफरत लिए फिर रहे हैं।