वो भारतीय कानून जो हर भारतीय को पता होने चाहिए
भारतीय संविधान में अनेक ऐसे अधिकार आम आदमी को दिए गए है जो, उन्हें मुश्किल समय में सहायता कर सकते है। लेकिन इनकी जानकारी ना होने के कारण लोग मुसीबत में फसें होने पर भी इन अधिकारों का लाभ नहीं उठा पाते है। इस लेख में हम ऐसे भारतीय कानूनों की बात करेंगे जो आम आदमी के लिए मुसीबत के समय बड़ी सहायता कर सकते हैं।
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर,धारा 46 (4) के अनुसार के असधारण परिस्थितियों के सिवाय, किसी भी स्त्री को सूर्यस्त के पश्चात और सूर्यस्त से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। कहीं ऐसी परिस्थितियां जहाँ महिला को गिरफ्तार करना पड़े तो वहाँ स्त्री पुलिस अधिकारी, लिखित में रिपोर्ट करके अपने जिले के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से परमिशन लेनी होगी, और तब उस की गिरफ्तारी की जायेगीं तथा अपराध करते समय महिला को बिना किसी परमिशन के गिरफ्तार किया जा सकता है। किसी भी महिला को गिरफ्तार करने के लिए महिला सिपाई का जरूरी है, जिस वक्त महिला को गिरफ्तार किया जाता है उस वक्त अधिकारी भी ऐसे प्रयास करते है की महिला सिपाई उस जगह उपस्थित हो,
कोई भी हॉटेल चाहे 5 स्टार क्यों न हो वो आपको पानी पीने और वाश-रूम इस्तमाल करने से नहीं रोक सकता
इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.
महिलाओं के लिए तो यह और कड़ाई से लागू होता है। खासकर गर्भवती महिला, बच्चे, बुजुर्ग, विकलांग व्यक्तियों को मना नहीं किया जा सकता है। हां, पानी आपने ब्रांड का ना मांगा हो, वरना ब्रांड के पानी के लिए आपको पैसे देने पड़ेंगे । जो साधारण पानी वहां पीने के लिए हो वो मांगें। पानी का चार्ज किसी होटल में नहीं लिया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता
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| गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता |
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.
पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता
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| पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता |
कानून की जानकारी न होने के कारण लोगों को पुलिस अधिकारियों की मनमानी का दंश झेलना पड़ता है. अक्सर लोग थाने में अपनी फरियाद लेकर जाते हैं और पुलिस अधिकारी रिपोर्ट दर्ज नही करते हैं लेकिन भारतीय कानून के मुताबिक रिपोर्ट दर्ज न करने पर पुलिस अधिकारी को जेल भी सकती है।
भारत में बाल श्रम में क्या सजा है
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| बाल श्रम |
अगर किसी भी काम को करने के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त किया जाता है तो उस व्यक्ति के खिलाफ दो साल तक की कैद की सजा तथा उस पर 50,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना लगेगा। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय संगठन द्वारा 12 जून वर्ष 2002 में की गई थी।
सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर क्या आप बीमा कवर क्लेम कर सकते है
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| सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर क्या आप बीमा कवर क्लेम कर सकते है |
हमारे देश में प्रतिवर्ष एलपीजी सिलेंडरों से दुर्घटनाओं की रिपोर्ट मिलती है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और वितरक, बीमा के प्रीमियम के लिए करोड़ों रुपए अदा करते हैं। परन्तु लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है।सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रुपये तक का बीमा क्लेम पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत किया जा सकता है। अगर आपके घर में किसी कारण बस सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है। अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है, या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है।
पैतृक संपत्ति में बेटा बेटी का हक
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| पैतृक संपत्ति में बेटा बेटी का हक |
कई बार लोगों के जहन में एक सवाल रहता है कि पिता की मृत्यु के बाद से क्या उनके नाम की संपत्ति में विवाहित बेटी का भी हक होता है। इसे लेकर कम ही लोगों को जानकारी है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में 2005 में संशोधन किया गया था ताकि बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का हिस्सा दिया जा सके। पैतृक संपत्ति के मामले में एक बेटी के पास अब जन्म के आधार पर एक हिस्सा है, जबकि स्व-अर्जित संपत्ति को वसीयत के प्रावधानों के अनुसार वितरित किया जाता है। यदि पिता का निधन हो जाता है, और उनकी मर्जी के बिना भी पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति दोनों में बेटी को बेटे के बराबर अधिकार है।









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