अब AI-सॉफ्टवेयर की मदद से लगाया जायेगा कोरोना का पता :
कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया ग्रसित है। दुनिया भर में लगभग 40 लाख लोग इस महामारी से संक्रमित हैं और वैश्विक स्तर पर लगभग 2.8 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले भारत में ही कोरोना के मामलों का आकड़ां 62,939 तक पहुंच गया है तथा 2109 मौतें भी हो चुकी हैं।
ऐसे कठिनाई भर स्थिति में एक उजाले की किरण सामने दिखी है। कोरोना मामले में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब सीने के एक्सरे से कोरोना के पता चल जाने का दावा किया है।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) ने एक आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस से चलने वाला कंप्यूटर मॉडल विकसित करने के लिए हाथ मिलाया है जो छाती एक्स-रे और सीटी स्कैन के जरिये COVID-19 संक्रमण के वास्तविक समय निदान में मदद कर सकता है।
के.जी.एम.यू. के वाईस चांसलर डॉ. एम.एल. भट्ट ने बताया है की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वाधान में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और डीप लर्निंग के टूल्स के माध्यम से कोविड मरीज के एक्सरे के आरंभिक दशा में ही कोविड के प्रभाव तथा फेफड़ों में डैमेज कितना है ये बताएगा तथा निमोनिया और सामान्य तरह की बिमारी वाले फेफड़ों में क्या बदलाव होते हैं तथा COVID-19 बिमारी के फेफड़ों में क्या बदलाव होते हैं ये बताएगा।
सबसे पहले, एक डेटाबेस बनाया गया है जो COVID-19 तथा गैर-कोविड फेफड़ों के इन्फेक्शन सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रोगियों तथा स्वस्थ व्यक्तियों के सीने के एक्स-रे और सीटी स्कैन से बना है।
Artificial Intelligence (AI) या “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” Computer science की एक शाखा है, जो ऐसी machines को विकसित कर रही जो humans की तरह सोच सके और कार्य कर सके।


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