22 वर्षीय प्रताप ने कचरे से बनाया ड्रोन, दुनिया में रोशन किया भारत का नाम
22 वर्षीय लड़का इन दिनों काफी चर्चा में है. लोग इनकी खूब तारीफ कर रहे हैं. आखिर तारीफ तो बनती ही है, उन्होंने जो कर दिखाया है, वो आसान काम नहीं है. महज 22 साल की आयु में उन्होंने बहुत बड़ा काम कर दिखाया. लड़का कर्नाटक का रहने वाला है. एनएम प्रताप नाम है. लेकिन लोग इनको प्यार से ड्रोन प्रताप कह रहे हैं. इस युवक ने कबाड़ से ड्रोन बना दिया.
एक 22 साल के लड़के ने इंडिया का नाम चमकाया है। वो भी अपने इनोवेटिव आइडिया से। कर्नाटक के एनएम प्रताप ने ई-कचरे की मदद से ड्रोन बना दिए,
14 साल के थे वो जब पहली बार ड्रोन देखा। खुद ही उन्होंने ड्रोन चलाने से लेकर उसे खोलना और रिपेयरिंग करना शुरू कर दिया। 16 साल के थे, तब उन्होंने पहला उड़ने वाल ड्रोन बनाया । ये ड्रोन फोटोज भी ले सकता था। खास बात ये है कि ये ड्रोन उन्होंने कबाड़ से बनाया था।
खास बात यह है कि ये ड्रोन उन्होंने कबाड़ से बनाया था. प्रताप ने यह सब खुद से सीखा है. ड्रोन बनाते समय प्रताप की पहली कोशिश यह रहती है कि ड्रोन बनाने में कम-से-कम लागत लगे।
जर्मनी में अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मेडल से किया जा चुका है सम्मानित
प्रताप को अभी तक 87 देशों से न्योता आ चुका है. जर्मनी में इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो 2018 में प्रताप को अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. प्रताप ई-कचरे की मदद से ऐसे ड्रोन बनाते हैं, जो जरूरतमंद लोगों के काम आते हैं. प्रताप ने अब तक 600 से अधिक ड्रोन बनाये हैं और अब उन्हें ड्रोन वैज्ञानिक के तौर पर पहचान मिल रही है।उनके कामों से प्रेरित कई देशों ने उन्हें आने के लिए निमंत्रण भेजा है. फ्रांस ने उन्हें मंथली सैलरी 16 लाख रुपये, 5 बीएचके हाउस और ढाई करोड़ की कार ऑफर किया था, लेकिन उन्होंंने अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इस बड़े ऑफर को भी ठुकरा दिया।
यहां तक कि 22 वर्षीय प्रताप आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी में लेक्चर दे चुके हैं। अभी वो डीआरडीओ के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। कर्नाटक बाढ़ के दौरान प्रताप के ड्रोन काफी नेक काम में इस्तेमाल आए। इन ड्रोन्स ने राहत कार्यों में लोगों का साथ दिया।



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