इन दिनों  विकास दुबे के एनकाउंटर को ले कर फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तूफान उठ खड़ा हुआ है।  फेसबुक पर विभिन्न ब्राह्मण ग्रुप पर विकास दुबे को ब्राह्मण शिरोमणि बता कर उसका महिमा मण्डन किया जा रहा है। 

 नए रक्त के ब्राह्मण कुमार (ये भी स्पष्ट नहीं है कि जो ब्राह्मण, विकास दुबे के एनकाउंटर पर इतना हल्ला कर रहे हैं वो सच में ब्राह्मण है या फिर फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बना कर इस तरह की बाते की जा रही हैं ) विकास दुबे के एनकाउंटर को ब्राह्मणों पर अत्याचार के रूप में देख व प्रस्तुत कर रहे है।  ऐसे में विकास दुबे की सच्चाई भी लोगों के सामने लाना बहुत जरुरी है।  

विकास दुबे का चरित्र कैसा था इसके लिए हमारी टीम ने एक विश्लेषण तैयार किया है जो आपके लिए जानना बेहद जरुरी है। 
सब से पहले विकास दुबे के ब्राह्मणवाद के बारे में आपको बताते हैं कि कैसे विकास दुबे ने अपने क्षेत्र के ब्राह्मणों के विकास और उन्नति में अपना सहयोग दिया। 


सोनीलाल चतुर्वेदी (हत्या : विकास दुबे)
सिद्धेश्वर पांडे (हत्या : विकास दुबे)
संतोष शुक्ला (हत्या : विकास दुबे)
अजय मिश्रा (हत्या : विकास दुबे)
कृष्ण बिहारी मिश्रा (हत्या : विकास दुबे)
कौशल तिवारी (हत्या : विकास दुबे)
दिनेश दुबे (हत्या : विकास दुबे)
सीओ देवेंद्र मिश्रा (हत्या : विकास दुबे)

ऊपर दिए गए आठ नाम में सभी  ब्राह्मण हैं जो कि विकास दुबे के द्वारा मौत के घाट उतार दिए गए। 
जो व्यक्ति एक के बाद एक ब्राह्मणों का रक्त पीता गया हो उसे कोई भी ब्राह्मण शिरोमणि कैसे बता सकता है। ब्राह्मण सीओ देवेंद्र मिश्रा की हत्या में तो उसने क्रूरता की सारी सीमाएं ही लाँघ दी। देवेंद्र मिश्र को दीवार के सहारे खड़ा कर के उनके सिर में गोलियां भर दी गईं, जब इतने से भी मन नहीं भरा तो कुल्हाड़ी से उनका पैर काट दिया गया।  क्या यही सच्चे ब्राह्मण के लक्षण हैं ? ब्राह्मणों की परम्परा क्या ऐसी ही चली  आई है ?(आपके विचार कमेंट में आमंत्रित हैं। 


क्या आप की निष्ठा इतनी मर चुकी है कि आप ब्राह्मणो के हत्यारे की मौत पर  विधवा विलाप कर रहे हैं? लेकिन उस हत्यारे द्वारा की गई अन्य ब्राह्मणो की हत्या का कोई शोक नहीं है ना ही उनके परिवार के प्रति कोई संवेदना?

यदि आप ब्राह्मण हैं तो एक प्रश्न स्वंय से अवश्य पूछिए कि ब्रह्म हत्यारे विकास दुबे के लिए क्या भगवान् परशुराम अपने हृदय में किंचित मात्र भी दया, करुणा को स्थान देंगे ?
क्या  आचार्य चाणक्य राष्ट्र और ब्राह्मणों के लिए घातक ऐसे ब्राह्मण के प्रति आपके जैसा विलाप करेंगे ?


जहाँ फेसबुक पर कुछ लोग विकास दुबे के एनकाउंटर का विरोध कर रहे हैं वहीँ एक बड़ा समूह उस दुर्दांत हत्यारे की जीवन लीला समाप्त होने पर खुश है।  जो समाज और देश के लिए घातक हो उसे समाप्त हो जाना ही चाहिए।  अगर ये काम अभी नहीं होता तो वो कुछ और ब्राह्मणों की हत्या करता। 








हो सकता है आप विकास दुबे के क्षेत्र से दूर रहे होंगे इसलिए आप उसका समर्थन कर रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि  विकास दुबे के जाने के बाद उसके गांव उसके क्षेत्र के लोग विशेष कर ब्राह्मण आज चैन की साँस ले पा रहे हैं।  क्यों कि विकास दुबे से सब से ज्यादा खतरा ब्राह्मणो को ही था।